इज़राइल को मात देने को तैयार आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनई

आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनई ईरान के सर्वोच्च नेता  हैं। पूरी दुनिया उनके बारे में बात कर रही है।

आयतुल्लाह अली ख़ामेनई
आयतुल्लाह अली ख़ामेनई

आज इजरायल के खिलाफ जंग छेड़ कर उन्होंने अपने विचार बता दिए वो इजरायल के सामने झुकने वाले नहीं है।

आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनई शिया इस्लामी राजनीति के प्रमुख विचारकों में से एक हैं।

उन्होंने अपने जीवन में धार्मिक, राजनीतिक, और क्रांतिकारी आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 

पूरा नाम: सय्यद अली हुसैनी ख़ामेनई

जन्म की तारीक : 17 जुलाई 1939

जन्म स्थान: मशहद, ईरान

पिता का नाम : सय्यद जवाद ख़ामेनई – जो एक प्रतिष्ठित शिया धर्मगुरु थे।

माता का नाम : खदीजा मिरदामादी – धार्मिक पृष्ठभूमि वाली महिला थी।

 

अली ख़ामेनई का पालन-पोषण एक धार्मिक और सादे वातावरण में हुआ।

बचपन से ही उन्हें इस्लामी अध्ययन और कुरान की शिक्षा दी गई।

 

उन्होंने मशहद और क़ुम में इस्लामी धर्मशास्त्र और दर्शनशास्त्र का अध्ययन किया।

उन्होंने आयतुल्लाह बोरुजेरदी, आयतुल्लाह खुमैनी और अन्य प्रमुख धार्मिक विद्वानों से शिक्षा प्राप्त की।

शिया इस्लाम की “उसूल-ए-फिक्ह” और “इल्म-उल-कलाम” में उन्हें विशेष दक्षता प्राप्त है।

 

राजनीतिक गतिविधियाँ और क्रांति

शाह विरोधी आंदोलन से उन्हें पहचान मिली।

ईरान के अंदर उस वक़्त मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी का राज था।

1960 और 70 के दशक में अली ख़ामेनई ने मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी के शासन के खिलाफ बोलना शुरू किया।

उस वक़्त ईरान में वेस्टर्न कल्चर था।

उस वक़्त ईरान में महिलाएं बुर्का नहीं पहनती थी ना ही वहा इस्लामिक कल्चर का प्रभाव था।

उनके इस्लामिक के प्रति कट्टर होने के कारण धार्मिक लोग उन्हें पसंद करने लगे।

मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी के विरोधी होने के कारण उन्हें कई बार गिरफ्तार और निर्वासित किया गया।

उन्होंने अयातुल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में ईरानी इस्लामी क्रांति (1979) का समर्थन किया।

 

इस्लामी क्रांति (1979)

क्रांति के बाद अयातुल्लाह खुमैनी के साथ वे देश के राजनीतिक संरचनाओं को इस्लामी बनाने में शामिल हुए।

उन्हें ईरान की नई इस्लामी सरकार में कई अहम पदों पर नियुक्त किया गया।

 राष्ट्रपति (1981-1989) का कार्यकाल

1981 में ईरान के दूसरे राष्ट्रपति बने।

उन्होंने युद्धकाल में (ईरान-इराक युद्ध 1980–1988) देश का नेतृत्व किया।

उनके कार्यकाल में आर्थिक प्रतिबंध, सुरक्षा चुनौतियाँ और इस्लामीकरण की प्रक्रिया तेज़ हुई।

 

सर्वोच्च नेता (1989–अब तक):

1989 में अयातुल्लाह खुमैनी की मृत्यु के बाद, अली ख़ामेनई को ईरान का सर्वोच्च नेता  घोषित किया गया।

यह पद ईरान में सबसे शक्तिशाली होता है — राष्ट्रपति, न्यायपालिका, सेना, और धार्मिक संस्थाएँ इनके अधीन होती हैं।

वे शिया मुसलमानों के लिए एक मरजए तक़लीद (अनुकरणीय धार्मिक नेता) भी हैं।

अली ख़ामेनई की विचारधारा और लेखन

 

उन्होंने कई किताबें और लेख लिखे हैं, जिनमें इस्लामी राजनीति, पश्चिम के प्रभाव, और युवाओं की भूमिका पर ज़ोर दिया गया है।

वे अमेरिका और इसराइल के कट्टर आलोचक माने जाते हैं।

उन्होंने “इस्लामी जागरूकता”  का समर्थन किया और मुस्लिम देशों में आत्मनिर्भरता पर ज़ोर दिया।

उनकी पत्नी का नाम सार्वजनिक नहीं है, पर वे धार्मिक परिवार से हैं।

उनके कई बेटे हैं, जिनमें से एक – मुजतबा ख़ामेनई – को भविष्य का नेता माना जाता है।

वे सादा जीवन जीने के लिए जाने जाते हैं, और आज भी बहुत सीमित व्यक्तिगत जीवन जीते हैं।

 

अली ख़ामेनई का वैश्विक प्रभाव

अली ख़ामेनई को आज विश्व के सबसे प्रभावशाली धार्मिक नेताओं में गिना जाता है।

उनका प्रभाव केवल ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि लेबनान, इराक, सीरिया और यमन तक उनकी नीतियों का असर होता है।

वे शिया समुदाय के बड़े हिस्से के लिए धार्मिक मार्गदर्शक हैं।

आयतुल्लाह अली ख़ामेनई न केवल एक राजनेता हैं, बल्कि वे एक धार्मिक विचारक, क्रांतिकारी नेता और शिया इस्लामी जगत की सबसे ताकतवर शख्सियतों में से एक हैं। उनका जीवन इस्लाम, राष्ट्रवाद और विरोध के मिलन का प्रतीक है।

 

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