इसराइल और ईरान के बीच युद्ध में अब अमेरिका भी कूद गया है।

यह जानकारी है डोनाल्ड ट्रंप ने खुद ट्वीट करके दी और रात को डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस वार्ता की जिसमें यह बताया कि अमेरिका ने ईरान की तीन न्यूक्लियर साइट्स पर हमला करके तीनों को तबाह कर दिया है ईरान की न्यूक्लियर साइट्स फोर्डो, नतांज और अस्फहान तीनों जगह अमेरिका ने बम बरसाए।

ईरान की न्यूक्लियर साइट्स को नष्ट करना इतना आसान काम नहीं है।
अमेरिका लगातार अपने कार्गो विमान से इजरायल के अंदर रक्षा उपकरण पंहुचा रहा है अब तक 800 से अधिक अमेरिकी विमान इजराइल में उतर चुके हैं जिनमें गोला बारूद और अन्य सैन्य उपकरण है।

अमेरिका इस युद्ध में इजरायल के साथ है वह साफ-साफ बता चुका है।
अमेरिका का कहना है कि वह दुनिया को ईरान के परमाणु हमले से बचने की कोशिश कर रहा है।
इसलिए अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को नष्ट करना चाहता है।
पर शायद अमेरिका की सोच कुछ और ही है वह कहता कुछ हो रहा है और करता कुछ और है जहां तक बात की जाए अमेरिका मिडल ईस्ट में अपना प्रभुत्व जमाना चाहता है।
अमेरिका ईरान के तेल संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है।
ईरान के पास तीन परमाणु केंद्र है
पहले है फोर्डो
इस प्लांट को ईरान ने पहाड़ी काटकर 90 मीटर गहराई में बनाया हुआ है जल्दी से हवाई हमले कर इस प्लांट को नष्ट करना संभव नहीं है।
सिर्फ अमेरिका के जीबी 57 और बंकर बस्टर बमों से ही इस प्लांट को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
दूसरा है नतांज
इस प्लांट पर लगभग 10 परमाणु बम बनाने जितना यूरेनियम मौजूद है और इजरायल के राष्ट्रपति ने इतने याहू को सबसे बड़ा खतरा इसी संयंत्र से है।
इस प्लांट में यूरेनियम 235 की सफाई का काम भी होता है।
तीसरा प्लांट है इस अस्फहान
इस प्लांट को यूरेनियम कंजर्वेशन प्लांट के तौर पर काम में लिया जाता है जहां पर यूरेनियम को सॉलिड से गैस में बदल जाता है।
इसी संयंत्र के पास में ईरान का सबसे बड़ा एयरबेस भी मौजूद है इस प्लांट की सुरक्षा के लिए ईरान ने अमेरिका के ही अप 14 फाइटर जेट तैनात कर रखे हैं।
और हथियार बनाने वाली फैक्ट्री भी यही पास में ही मौजूद है जो कि ईरान की सबसे बड़ी हथियार बनाने वाली फैक्ट्री है।
इसराइल लगातार ईरान के एयर बेस को तेल उत्पादक क्षेत्र को टारगेट करके हमला कर रहा है।
वहीं ईरान भी इजरायल के मुख्य इमारत को मुख्य ऑफिसों को सरकारी विभागों को टारगेट कर कर हमला कर रहा है।